Ziyarat E Nahiya In Hindi [2021] Jun 2026
इस ज़ियारत का उल्लेख प्रमुख शुरुआती ज़ियारत संग्रहों में मिलता है, जैसे कि:
(Ziyarat al-Nahiya al-Muqaddasa) शिया इस्लाम में एक अत्यंत भावुक और गहरा आध्यात्मिक पाठ है, जिसका शाब्दिक अर्थ "पवित्र क्षेत्र की ज़ियारत" है। यह विशेष रूप से कर्बला के शहीदों और इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत के प्रति इमाम-ए-ज़माना (अ.त.फ़.श.) की श्रद्धांजलि मानी जाती है।
इमाम बयान करते हैं कि जब ज़ालिमों ने इमाम हुसैन (अ.स.) को चारों तरफ़ से घेर लिया था, जब उनके जिस्म पर तीरों की बारिश हो रही थी और वह घोड़े की जीन से ज़मीन पर आ रहे थे, तो उस वक़्त का मंज़र कितना भयानक था! इमाम महदी (अ.स.) कहते हैं कि हुसैन (अ.स.) के जिस्म को घोड़ों की टापों से रौंदा गया।"
को समझना होगा। यह वह ज़ियारत है जो हमारे ज़माने के इमाम, इमाम महदी (अ.स.) की तरफ़ से आई है। सुनो, इमाम अपने नाना हुसैन (अ.स.) को किस तरह याद करते हैं।"
3. कर्बला के वीभत्स दृश्यों का सजीव चित्रण ziyarat e nahiya in hindi
यह ज़ियारत केवल कुछ प्रार्थनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह कर्बला के पूरे दृश्य को आँखों के सामने जीवंत कर देती है। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: 1. पैगंबरों पर सलाम
इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी देना है और यह किसी धार्मिक फतवे या आधिकारिक टिप्पणी का स्थान नहीं लेता।
The word Ziyarat means "visiting" or "greeting," often referring to the visitation of holy shrines. Nahiya al-Muqaddasa literally translates to the or "Sacred Area," a term used during the Minor Occultation to refer to the 12th Imam. Unlike other Ziyarats, this one serves as a comprehensive eyewitness-style account—relayed through divine knowledge—of the martyrdom of Imam Hussain (as). Key Themes and Structure
अल्लाह से गुनाहों की माफ़ी और इमाम के मिशन का हिस्सा बनने की प्रार्थना। निष्कर्ष the blood-dyed hair
The Imam (atfs) describes the physical suffering—the severed arteries, the blood-dyed hair, the unclothed corpses, and the heads raised on spears.
Share public link
कर्बला के को विस्तार से जानने में।
ज़ियारत की शुरुआत अल्लाह के चुने हुए नबियों, पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.), और अन्य मासूम इमामों (अ.) को सलाम भेजने से होती है。यह इस बात को रेखांकित करती है कि इमाम हुसैन (अ.) सभी पिछले पैगंबरों के वारिस और उनके द्वारा लाए गए संदेश के रक्षक थे。 the unclothed corpses
इस्लामी विद्वानों और हदीस की किताबों के अनुसार, ज़ियारत-ए-नाहिया के दो मुख्य रूप (वर्जन) मिलते हैं:
इस ज़ियारत में इमाम महदी (अ.स.) ने इमाम हुसैन (अ.स.) के आखिरी लम्हों का ऐसा वर्णन किया है, जिसे पढ़कर किसी की भी आँखों में आँसू आ जाएं।
"ऐ सलाम हो तुम पर, ऐ अबा अब्दिल्लाह अल-हुसैन (अ.स.)! ऐ मेरे पिता के पिता और ऐ सच्चे इमामों की निगाहों की ठंडक!"